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क्या पाकिस्तान में भारत से ज्यादा टैक्स है या कम, जानिए इस रिपोर्ट में
23 अप्रैल, 2024 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
क्या पाकिस्तान में भारत से ज्यादा टैक्स है या कम, जानिए इस रिपोर्ट में

क्या पाकिस्तान में भारत से ज्यादा टैक्स है या कम, जानिए इस रिपोर्ट में

News World Desk
डेस्क रिपोर्टर
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नई दिल्ली। भारत में जीएसटी कलेक्शन लगातार बढ़ा है। सरकार का खजाना भरने में जीएसटी कलेक्शन (GST) का काफी योगदान है। पुरानी अप्रत्‍यक्ष कर व्‍यवस्‍था की जगह पहली बार जुलाई 2017 को पूरे देश भर में वस्‍तु एवं सेवा कर यानी की जीएसटी को लागू किया गया था। भारत में जुलाई 2017 में जीएसटी के लागू होने से पुरानी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का अंत हो गया था। जीएसटी के लागू होने से पहले, भारत में विभिन्न राज्यों में अलग-अलग प्रकार की टैक्स प्रणालियां थीं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में परेशानी होती थी। जीएसटी के लागू होने से पहले व्यापारियों को विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कर प्रणालियों का सामना करना पड़ता था। देश में राजस्व के संग्रह और विकास में जीएसटी का क्रांतिकारी योगदान है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान में वस्तुओं और सेवाओं पर किस तरह से टैक्स लगाया जाता है। क्या पाकिस्तान में भारत से ज्यादा टैक्स है या कम। आईए आपको बताते हैं।

पाकिस्तान में लगता है इतना टैक्स

पाकिस्तान में सामानों की बिक्री पर जनरल या स्टैंडर्ड सेल्स टैक्स लगता है। यह करीब 18 फीसदी तक है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में पहले ये टैक्स रेट 17 फीसदी था, जिसे साल 2023 में करीब 64 करोड़ डॉलर के एडिशनल रेवेन्यू के लिए बढ़ाया गया था। इस दौरान इसे बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था। पाकिस्तान में जनरल सेल्स टैक्स को वैट भी कहा जाता है। वहीं सेवाओं के लिए टैक्स सिस्टम अलग है। इसी के साथ सामानों के कमर्शियल आयात पर अलग से 3 फीसदी वैट और इनएक्टिव व टैक्सपेयर्स को सप्लाई के मामले में 4 फीसदी अतिरिक्त टैक्स लागू होता है।

सेल्स टैक्स भी लगता है

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में सर्विसेज पर सेल्स टैक्स राज्यों की ओर से लगाया जाता है। पाकिस्तान में सर्विसेज पर सेल्स टैक्स अलग-अलग राज्यों में 13 से 16 फीसदी तक है। इन टैक्स के बीच पाकिस्तान में महंगाई से भी लोगों का बुरा हाल है। पाकिस्तान में महंगाई अपने चरम पर है। पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई के बीच लोगों के लिए रोजमर्रा के सामाना खरीदना भी मुश्किल होता जा रहा है। महंगाई के बढ़ते बोझ से आम आदमी परेशान है।

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