
डेस्क रिपोर्टर
News World Deskनई दिल्ली, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क।सरकार कैपिटल गेन टैक्स को लेकर नियम में बदलाव कर सकती है। रिपोर्ट के अनुसार अगले बजट में सरकार रेवेन्यू कलेक्शन को बढ़ाने के लिए कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव कर सकती है। इसको लेकर वित्त मंत्रालय विचार कर रहा है।
शेयर बाजार से कमाई पैसिव इनकम
वित्त मंत्रालय के समक्ष रखे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि, शेयर बाजार में कमाई पैसिव इनकम की तरह है। ऐसे में शेयर बाजार की कमाई पर लगने वाले टैक्स रेट बिजनेस इनकम पर लगने वाले टैक्स के मुकाबले कम नहीं होना चाहिए। बिजनेस इनकम में कई रिस्क जुड़े होते हैं, साथ ही यह रोजगार का अवसर भी देता है। इसके अलावा सरकार कई वेलफेयर स्कीम के बारे में विचार कर रही है। जिसके कारण एडिशनल रेवेन्यू जनरेट करने की जरूरत है। सूत्रों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स में किसी तरह का बदलाव लाने के लिए सरकार को कानून में बदलाव करना होगा, इसके लिए बजट सेशन सबसे उपयुक्त समय है। तब तक वित्त मंत्रालय इस पर गंभीरता से विचार भी कर लेगा।
कैपिटल गेन क्या है
मान लीजिए आप ने कुछ साल पहले किसी प्रॉपर्टी या सोने में एक लाख निवेश किया था जो अब बढ़कर दो लाख हो गया है, तो इसमें एक लाख को कैपिटल गेन माना जाएगा, इस पर ही आपसे टैक्स लिया जाएगा।
दो तरह का होता है कैपिटल गेन टैक्स
कैपिटल गेन टैक्स की बात करें तो ये दो तरह का होता है। पहला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन और दूसरा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन। देश में लिस्टेड इक्विटी पर 1 साल से अधिक समय के लिए एक लाख की सीमा से ऊपर के लाभ पर 10% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का भुगतान करना होता है। 1 साल से कम समय के लिए रखे गए शेयर पर 15 फ़ीसदी के हिसाब से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन का भुगतान करना होता है। ये प्रावधान एक अप्रैल 2019 से लागू है।
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