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अमेरिका के टैरिफ डर से चौथे दिन भी टूटा शेयर बाजार, सेंसेक्स 800 अंक लुढ़का – निवेशकों में हड़कंप
08 जन, 2026 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
अमेरिका के टैरिफ डर से चौथे दिन भी टूटा शेयर बाजार, सेंसेक्स 800 अंक लुढ़का – निवेशकों में हड़कंप

अमेरिका के टैरिफ डर से चौथे दिन भी टूटा शेयर बाजार, सेंसेक्स 800 अंक लुढ़का – निवेशकों में हड़कंप

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। लगातार गिरते बाजार ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। गुरुवार को जैसे ही बाजार खुला, कुछ ही मिनटों में लाल निशान गहराता चला गया। एक्सपायरी वाले दिन सेंसेक्स करीब 800 अंक लुढ़क गया, वहीं निफ्टी 50 में 250 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। आम निवेशक परेशान है कि आखिर बाजार को हो क्या गया है और ये गिरावट थम क्यों नहीं रही।


चार दिन से जारी इस गिरावट का असर हर सेक्टर में साफ दिख रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा मार तेल और मेटल शेयरों पर पड़ी है। कई दिग्गज कंपनियों के शेयर 3 फीसदी तक टूट गए। जानकारों का कहना है कि इस बार बाजार की घबराहट की वजह भारत नहीं, बल्कि अमेरिका है।


चौथे दिन भी लाल निशान में खुला बाजार

गुरुवार को डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी थी, लेकिन निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक कोई राहत नहीं मिली। सेंसेक्स जहां 800 अंकों से ज्यादा टूट गया, वहीं निफ्टी 50 भी 25,000 के अहम स्तर से फिसल गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई। तेल और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी नजर आई। स्टील, एल्यूमिनियम, ऑयल रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कंपनियों के शेयरों में 2 से 3 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग और आईटी शेयरों ने भी बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन वे भी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए।


ट्रंप के नए टैरिफ बिल से क्यों डरे निवेशक?

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत पर टैरिफ बढ़ाने की बात कही है। अमेरिका में एक नया बिल पेश किया गया है, जो अगर लागू हो गया तो भारत समेत कुछ देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बिल के तहत रूस से तेल, गैस या ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर करीब 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है। ऐसे में निवेशकों को डर सता रहा है कि अगर यह बिल पास हो गया, तो भारतीय कंपनियों के एक्सपोर्ट, मुनाफे और विदेशी निवेश पर सीधा असर पड़ेगा। यही डर बाजार में बिकवाली की सबसे बड़ी वजह बन गया है।


सिर्फ भारत नहीं, ग्लोबल मार्केट भी दबाव में

यह गिरावट केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है। अमेरिका के इस प्रस्तावित बिल ने पूरी दुनिया के निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। जापान और हांगकांग जैसे बड़े एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।

ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ने से विदेशी निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। जनवरी की शुरुआत से ही अब तक हजारों करोड़ रुपये की बिकवाली हो चुकी है। इससे बाजार पर दबाव और ज्यादा बढ़ गया है।


कब थमेगी गिरावट, कब लौटेगी तेजी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाजार में यह गिरावट कब रुकेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल निवेशकों को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। अमेरिका के बिल पर जब तक तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि उम्मीद की एक किरण भी है। अगले कुछ दिनों में भारतीय कंपनियां अपने तिमाही नतीजे पेश करेंगी। अगर बड़े कॉर्पोरेट्स के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे, तो बाजार का मूड फिर से बदल सकता है और निवेशकों का भरोसा लौट सकता है।


निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?

घबराहट में शेयर बेचने से बचें।

मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही निवेश बनाए रखें।

नई खरीदारी से पहले अमेरिकी टैरिफ बिल से जुड़ी खबरों पर नजर रखें।

लॉन्ग टर्म निवेशक इस गिरावट को मौके की तरह भी देख सकते हैं, लेकिन सोच-समझकर कदम उठाएं।

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