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भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू, जानिए आज से क्या हुआ सस्ता और किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

15 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू, जानिए आज से क्या हुआ सस्ता और किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच 15 जुलाई से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) प्रभावी हो गया है। इस समझौते के लागू होते ही दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क में बड़े बदलाव शुरू हो गए हैं, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं और निर्यातकों दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।


इस समझौते के तहत भारत के 99% उत्पाद अब UK में शून्य टैरिफ पर भेजे जा सकेंगे, जबकि UK से आने वाले 99% सामान भारत में औसतन 3% टैरिफ पर आयात होंगे। अनुमान है कि 2030 तक दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।


तीन साल की बातचीत के बाद लागू हुआ समझौता

भारत और UK के बीच इस व्यापार समझौते पर बातचीत 13 जनवरी 2022 से शुरू हुई थी। करीब 3.5 वर्ष और 14 दौर की वार्ताओं के बाद 24 जुलाई 2025 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में इस पर हस्ताक्षर किए थे।


समझौता लागू होने से पहले भारत में UK की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे आधुनिक भारत-UK साझेदारी का ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में विकास के नए दौर की शुरुआत करेगा।


भारत में किन उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ेगा

  • कम आयात शुल्क का फायदा कई ब्रिटिश उत्पादों पर दिखाई देगा।

  • स्कॉच व्हिस्की और जिन पर शुल्क 150% से घटकर 75% होगा, जिसे समझौते के 10वें वर्ष तक 40% किया जाएगा।

  • जगुआर लैंड रोवर और रोल्स रॉयस जैसी लग्जरी कारों पर शुल्क 100% से घटकर कोटा सिस्टम के तहत 10% तक आएगा। इनकी कीमतों में 20–30% तक कमी आने की संभावना है।

  • सैल्मन, लैंब, चॉकलेट, बिस्किट और सॉफ्ट ड्रिंक्स पर भी शुल्क कम होगा।

  • कॉस्मेटिक्स, मेडिकल डिवाइस और एयरोस्पेस पार्ट्स पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% हो जाएगा।

  • ब्रिटेन से आने वाले ब्रांडेड कपड़े, फैशन प्रोडक्ट्स, होमवेयर, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक्स भी अपेक्षाकृत सस्ते हो सकते हैं।


भारतीय उद्योगों को कहां मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ

FTA का सबसे बड़ा फायदा भारत के निर्यात आधारित उद्योगों को मिलने की संभावना है।


टेक्सटाइल उद्योग

भारतीय कपड़ों और होम टेक्सटाइल्स पर UK में लगने वाला 8–12% शुल्क समाप्त होगा। इससे तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे निर्यात केंद्रों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और अगले 3 वर्षों में 40% तक वृद्धि का अनुमान है।


ज्वेलरी और लेदर

भारत से भेजी जाने वाली ज्वेलरी, बैग और जूतों पर UK में आयात शुल्क नहीं लगेगा, जिससे MSME और लग्जरी ब्रांड्स दोनों को फायदा होगा।


इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स

भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग उपकरण और ऑटो पार्ट्स पर UK ने आयात शुल्क समाप्त कर दिया है। इससे पुणे, चेन्नई और गुड़गांव जैसे विनिर्माण केंद्रों को लाभ मिलेगा।


फार्मा और मेडिकल डिवाइस

भारतीय जेनेरिक दवाओं के लिए UK में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आसान होगी। इससे दवाओं की मंजूरी तेज होगी और NHS तक उनकी पहुंच आसान बनेगी।


कृषि और समुद्री उत्पाद

बासमती चावल, झींगा, प्रीमियम चाय और मसालों पर UK का आयात शुल्क समाप्त होगा। इसका लाभ असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल के निर्यातकों को मिलेगा।


केमिकल और क्लीन एनर्जी

एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशलिटी केमिकल्स के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। भारत ने 2030 तक UK में केमिकल निर्यात दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन और EV इंफ्रास्ट्रक्चर में संयुक्त निवेश और तकनीकी सहयोग का रास्ता भी खुलेगा।


अर्थव्यवस्था और रोजगार पर क्या असर होगा

समझौते के तहत भारत के 99% उत्पाद UK में बिना शुल्क के पहुंचेंगे। इससे टेक्सटाइल, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, मरीन प्रोडक्ट्स और इंजीनियरिंग सामान के निर्यात में तेजी आने की संभावना है।


मुख्य संभावित लाभ:

2030 तक भारत का UK को निर्यात 29 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

टेक्सटाइल और चमड़ा जैसे क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने की संभावना है।

भारत के 6 करोड़ MSME को नए बाजार और बेहतर मार्जिन मिल सकते हैं।

UK की कंपनियों का IT, फाइनेंशियल सर्विसेज और ग्रीन टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ सकता है।

2030 तक द्विपक्षीय व्यापार में 15% वार्षिक वृद्धि का अनुमान है।


भारत के अन्य व्यापार समझौते

भारत पहले ही श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, मॉरीशस, ASEAN और EFTA देशों/ब्लॉक्स के साथ व्यापार समझौते कर चुका है।


ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, एशियाई देशों के बाद भारत अब EU और US जैसी पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि निर्यात बाजार का और विस्तार किया जा सके।

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