
जंग थमी जरूर है, लेकिन महंगाई की मार जारी है। अमेरिका-ईरान-इजरायल तनाव के बीच तेल की कीमतों ने आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। भारत में फिलहाल राहत है, लेकिन आगे क्या होगा—यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम में भारी उछाल
वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा असर एशियाई और छोटे देशों पर देखा गया है। फिलीपींस में कीमतें 172%, लाओस में 169% और म्यांमार में 161.4% तक बढ़ गई हैं। वहीं मलेशिया (124.7%), न्यूजीलैंड (89.9%) और यूएई (86.1%) भी इस लिस्ट में शामिल हैं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि संकट कितना गहरा है—और असर अभी और बढ़ सकता है।
आखिर क्यों बढ़े तेल के दाम?
इस पूरी महंगाई की जड़ है क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल। जंग शुरू होने के बाद कच्चा तेल 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 111 डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि सीजफायर के बाद थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन बाजार अभी भी दबाव में है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ रहा है—और आने वाले दिनों में यह असर और दिख सकता है।
छोटे देशों पर सबसे ज्यादा असर
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर छोटे और आयात पर निर्भर देशों पर पड़ा है। इन देशों में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं क्योंकि इनके पास विकल्प सीमित हैं। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो बड़े देशों में भी महंगाई की लहर तेज हो सकती है—जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगी।
भारत में अभी राहत, लेकिन कब तक?
दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी बड़ी उथल-पुथल के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। लेकिन आम लोगों के बीच चर्चा है कि 5 राज्यों के चुनाव के चलते कीमतें रोकी गई हैं। जैसे ही चुनावी नतीजे आएंगे, दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
चुनाव के बाद क्या होगा बड़ा फैसला?
अब असली नजर चुनावी परिणामों के बाद सरकार के फैसले पर है। क्या कीमतें स्थिर रखी जाएंगी या फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते बढ़ोतरी होगी? एक बात साफ है—अगर क्रूड ऑयल महंगा बना रहा, तो भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। अब सबकी नजर आने वाले कुछ दिनों पर टिकी है।
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