
कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट आई है, लेकिन आम लोगों को अभी तक राहत नहीं मिली। सवाल वही है—जब तेल सस्ता हुआ, तो पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं? जवाब थोड़ा जटिल है।
सीजफायर के बाद क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम
डोनाल्ड ट्रम्प के सीजफायर ऐलान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद बनी। इसका सीधा असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा, जहां से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है—रास्ता खुलते ही सप्लाई सुधरी और कीमतें तेजी से गिर गईं।
फिर भी पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं हुआ?
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत नहीं बदलते। Indian Oil Corporation, BPCL और HPCL रोजाना कीमतें तय करती हैं, लेकिन इसमें ग्लोबल कीमतों का असर देरी से दिखता है।
7-10 दिन क्यों लगते हैं?
कच्चा तेल सस्ता होने के बाद भी उसका असर रिटेल कीमतों तक पहुंचने में समय लगता है। पहले कंपनियां पुराने स्टॉक का इस्तेमाल करती हैं, फिर नए दामों पर खरीद होती है। उसके बाद ही कीमतों में बदलाव होता है। इसी वजह से आम तौर पर 7 से 10 दिन का गैप देखने को मिलता है।
अभी क्या है मौजूदा स्थिति?
फिलहाल देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
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