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सोना न खरीदने की मोदी की अपील के बीच RBI ने बढ़ाया गोल्ड रिजर्व, आखिर क्या है पूरी रणनीति?

16 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सोना न खरीदने की मोदी की अपील के बीच RBI ने बढ़ाया गोल्ड रिजर्व, आखिर क्या है पूरी रणनीति?
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। “एक साल तक सोना मत खरीदिए…” PM मोदी की इस अपील के बाद अब बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब सरकार लोगों से गोल्ड खरीदी कम करने को कह रही है, तब RBI लगातार सोना क्यों जमा कर रहा है? कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इसी मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि सरकार खुद महीनों में भारी मात्रा में सोना खरीद रही है। लेकिन असली कहानी आंकड़ों में छिपी है।


RBI का गोल्ड रिजर्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के पास फिलहाल 880.5 टन गोल्ड रिजर्व है। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। भारत दुनिया में गोल्ड रिजर्व रखने वाले देशों की सूची में अब 5वें स्थान पर पहुंच चुका है। सिर्फ पिछले 10 सालों में भारत का गोल्ड रिजर्व 560 टन से बढ़कर 880.5 टन हो गया। यानी करीब 57% की बढ़ोतरी हुई है। यहीं से बहस तेज हो गई कि आखिर RBI इतनी तेजी से सोना क्यों जोड़ रहा है।


सुरजेवाला का दावा कितना सही?

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मोदी सरकार ने 7 महीनों में 85.88 मीट्रिक टन सोना खरीदा। आंकड़े बताते हैं कि RBI ने हाल के वर्षों में गोल्ड रिजर्व जरूर बढ़ाया है, लेकिन दावा जिस तरीके से पेश किया गया, तस्वीर उससे थोड़ी अलग है। 2021 से 2025 के बीच RBI ने कुल करीब 185 टन सोना खरीदा। यानी खरीद बढ़ी है, लेकिन इसे लगातार और दीर्घकालिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।


अब विदेशी बैंकों में नहीं, भारत में रखा जा रहा सोना

RBI सिर्फ सोना खरीद नहीं रहा, बल्कि उसे भारत वापस भी ला रहा है। 2023 में RBI के कुल गोल्ड रिजर्व का केवल 38% हिस्सा देश के भीतर था। अब यह बढ़कर 77% तक पहुंच गया है। इस समय करीब 680 टन सोना भारत की तिजोरियों में रखा गया है, जबकि लगभग 197 टन गोल्ड विदेशी तिजोरियों में है। विशेषज्ञ इसे “गोल्ड की घर वापसी” बता रहे हैं। लेकिन इसकी वजह और भी बड़ी है।


दुनिया अचानक सोना क्यों खरीद रही है?

भारत अकेला देश नहीं है जो तेजी से गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहा है। चीन, तुर्किये, पोलैंड और ब्राजील जैसे कई देशों के केंद्रीय बैंक भी लगातार सोना खरीद रहे हैं। चीन के पास इस समय 2313 टन से ज्यादा गोल्ड रिजर्व है और वह पिछले कई महीनों से लगातार खरीद कर रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने 2025-26 में मिलकर 900 टन से ज्यादा सोना खरीदा। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर पर घटता भरोसा माना जा रहा है।


रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदली दुनिया की सोच

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूस के करीब 300 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार पर रोक लगा दी थी। इस कदम ने कई देशों को डरा दिया। संदेश साफ था—अगर डॉलर आधारित संपत्ति किसी विवाद में फंस गई, तो उस पर रोक लग सकती है। यहीं से दुनिया के कई देशों ने डॉलर पर निर्भरता कम करने और सोने की तरफ झुकाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई। अब भारत भी उसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।


RBI सोना क्यों खरीद रहा है?

RBI की रणनीति सीधी है—फॉरेन रिजर्व को ज्यादा सुरक्षित बनाना। फिलहाल भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी करीब 16.7% तक पहुंच चुकी है। सोने की खासियत यह है कि इसे दुनिया में कहीं भी वैल्यू स्टोर माना जाता है। डॉलर कमजोर पड़े या वैश्विक संकट आए, तब भी गोल्ड मजबूत विकल्प बना रहता है। इसलिए RBI इसे सुरक्षा कवच की तरह देख रहा है।


फिर जनता को सोना खरीदने से क्यों रोका जा रहा?

भारत अपनी जरूरत का करीब 99% सोना विदेशों से आयात करता है। यानी जितना ज्यादा सोना देश में खरीदा जाएगा, उतने ज्यादा डॉलर विदेश भेजने पड़ेंगे। इसका सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और आयात बिल पर पड़ता है। पिछले कारोबारी साल में भारत ने करीब 6.4 लाख करोड़ रुपए का सोना आयात किया। यानी अगर लोग कम सोना खरीदेंगे, तो डॉलर की बचत होगी और रुपये पर दबाव कम पड़ेगा।


सोने की कीमतों ने भी बढ़ाई चिंता

सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड का भाव 76 हजार डॉलर प्रति किलो से बढ़कर करीब 1.52 लाख डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गया। भारत में भी सोने की कीमत करीब 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुकी है। इसका असर सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अब लोग गहनों से ज्यादा निवेश के लिए सोना खरीद रहे हैं। यही वजह है कि सरकार आयात दबाव को लेकर सतर्क नजर आ रही है।


गोल्ड इम्पोर्ट में बड़ी गिरावट

ऊंची कीमतों के चलते गोल्ड इम्पोर्ट तेजी से घट रहा है।

जनवरी में भारत ने करीब 100 टन सोना आयात किया था। फरवरी में यह घटकर 65 टन और मार्च में करीब 22 टन रह गया। अप्रैल में अनुमान है कि आयात सिर्फ 15 टन तक सीमित रह सकता है। यह पिछले कई दशकों के सबसे निचले स्तरों में गिना जा रहा है।


आखिर सरकार की पूरी रणनीति क्या है?

सरकार और RBI की रणनीति अलग-अलग स्तर पर काम कर रही है। RBI सोना खरीदकर देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना चाहता है। वहीं सरकार चाहती है कि आम लोग फिलहाल कम सोना खरीदें, ताकि डॉलर की बचत हो और आयात बिल नियंत्रित रहे।

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