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भारत से बढ़ती दोस्ती पर EU का दांव! रूस संग रिश्तों को लेकर टेंशन, अमेरिका भी अलर्ट

18 सित, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भारत से बढ़ती दोस्ती पर EU का दांव! रूस संग रिश्तों को लेकर टेंशन, अमेरिका भी अलर्ट

भारत से बढ़ती दोस्ती पर EU का दांव! रूस संग रिश्तों को लेकर टेंशन, अमेरिका भी अलर्ट

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। दुनिया की अर्थव्यवस्था बदल रही है और इसी बीच यूरोपीय संघ (EU) भारत के साथ रिश्तों को नया आयाम देने में जुटा है। रक्षा, टेक्नोलॉजी और व्यापार जैसे अहम क्षेत्रों में EU भारत के साथ हाथ मिलाना चाहता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रूस के साथ भारत की गहरी दोस्ती इन रिश्तों पर ब्रेक लगा सकती है?


मुक्त व्यापार समझौते पर फोकस

EU और भारत के बीच एक बड़े मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत ज़ोरों पर है। दोनों पक्ष इस साल के अंत तक डील को अंतिम रूप देना चाहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद, EU नए सहयोगियों की तलाश में है। ब्रुसेल्स, मेक्सिको, मर्कोसुर देशों, भारत और इंडोनेशिया के साथ व्यापार समझौते करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


अमेरिका को खटक रही भारत-रूस की नज़दीकी

साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद में इज़ाफा किया। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और भारतीय सैनिकों ने रूस नेतृत्व वाले सैन्य अभ्यास में भी भाग लिया। यह कदम अमेरिका को बिल्कुल पसंद नहीं आया।

 

अमेरिकी अधिकारियों ने G7 और EU देशों से साफ कहा है कि “भारत और चीन पर रूसी तेल खरीदने के लिए टैरिफ लगाने पर विचार किया जाए।”


भारत में बड़ा फायदा देख रहा EU

EU ने एक आधिकारिक दस्तावेज में साफ लिखा है कि वह रूस की सैन्य क्षमता को कमजोर करने और प्रतिबंधों को दरकिनार करने से रोकने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। EU मानता है कि भारत 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, और यह साझेदारी दोनों के लिए सुनहरा मौका साबित हो सकती है।


निवेश से लेकर ग्रीन एनर्जी तक योजना

EU चाहता है कि भारत के साथ निवेश सुरक्षा, हवाई परिवहन, सप्लाई चेन सुरक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन, भारी उद्योगों को प्रदूषण मुक्त करने और रिसर्च-इनnovation जैसे कई क्षेत्रों में समझौते हों।


सुरक्षा और रक्षा साझेदारी भी एजेंडे में है। EU पहले ही जापान और दक्षिण कोरिया के साथ ऐसे समझौते कर चुका है। अब भारत के साथ भी अफ्रीका और दक्षिण एशिया में संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने की संभावना है।

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