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UPI पर ₹2,000 की लिमिट ने बढ़ाई चिंता, ₹5,000 या ₹10,000 भेजने वालों के लिए क्या बदलेगा? जानिए नियम

15 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
UPI पर ₹2,000 की लिमिट ने बढ़ाई चिंता, ₹5,000 या ₹10,000 भेजने वालों के लिए क्या बदलेगा? जानिए नियम
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट फीस नहीं ले सकते। वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है।


₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर अभी कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। सरकार को आगे नियम और दर तय करनी होगी, जबकि P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे मुफ्त रहेंगे।


₹2,000 की लिमिट को लेकर सबसे बड़ा भ्रम

₹2,000 को UPI से पैसे भेजने की अधिकतम सीमा नहीं बनाया गया है। इससे ज्यादा रकम का ट्रांजैक्शन किया जा सकता है। यह रकम सिर्फ उस सीमा को दर्शाती है, जिस तक फिलहाल UPI पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर फीस नहीं लगा सकते।


₹2,500, ₹5,000 या ₹10,000 भेजने पर अभी क्या होगा?

अगर कोई व्यक्ति ₹2,500, ₹5,000 या ₹10,000 का UPI पेमेंट करता है, तो सिर्फ रकम ₹2,000 से अधिक होने के कारण अभी कोई नई फीस नहीं लगेगी। बड़े पेमेंट पर चार्ज लागू करने के लिए सरकार को आगे अलग नियम बनाकर दर निर्धारित करनी होगी।


असली चर्चा बड़े मर्चेंट पेमेंट को लेकर

वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार दुकानदारों को किए गए UPI पेमेंट में करीब 4% ट्रांजैक्शन ही ₹2,000 से अधिक के थे। लेकिन रकम के लिहाज से इन्हीं ट्रांजैक्शन की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई रही। यानी संख्या कम होने के बावजूद बड़े कारोबारी पेमेंट में काफी ज्यादा पैसा शामिल है।


दुकानदार को बड़े UPI पेमेंट पर लग सकता है MDR

आगे बनने वाली व्यवस्था में मुख्य फोकस मर्चेंट पेमेंट पर है। यानी दुकान, कारोबारी या सर्विस प्रोवाइडर को बड़ी रकम UPI से देने वाले ट्रांजैक्शन इसके दायरे में आ सकते हैं।


सरकार की ओर से कहा गया है कि यदि MDR व्यवस्था लागू होती है, तो तय रकम से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर इसे लगाया जा सकता है।


MDR क्या है और किससे लिया जाता है?

MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा के बदले मर्चेंट से लिया जाने वाला शुल्क है। आसान शब्दों में इसे पेमेंट स्वीकार करने की लागत के रूप में समझा जा सकता है। कार्ड से होने वाले पेमेंट में इस तरह का चार्ज पहले से मौजूद है।


MDR की दर अभी तय नहीं

अगर भविष्य में बड़े मर्चेंट UPI पेमेंट पर MDR लागू किया जाता है, तो उसकी दर अभी तय नहीं हुई है। सरकार के अनुसार इसकी दर बहुत मामूली रखी जाएगी और यह डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR की तुलना में काफी कम होगी।


क्या ग्राहक से भी सीधे पैसे लिए जाएंगे?

अभी ऐसा कोई नियम लागू नहीं है। MDR की चर्चा मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबारी से जुड़े शुल्क के रूप में हो रही है। ग्राहक से सीधे कोई फीस ली जाएगी या नहीं, यह आगे सरकार द्वारा तय की जाने वाली व्यवस्था से स्पष्ट होगा।


परिवार या दोस्त को ₹10 हजार भेजने पर चार्ज?

नहीं। P2P पेमेंट यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजने वाले ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। इसलिए दोस्त या परिवार के सदस्य को ₹5,000 या ₹10,000 भेजने पर केवल रकम ₹2,000 से अधिक होने के कारण कोई नई फीस लागू नहीं हुई है।


सरकार ने कानून में बदलाव क्यों किया?

संसद ने अगस्त 2026 में Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 पास किया था। इसके माध्यम से Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में बदलाव किया गया। इस संशोधन के बाद सरकार को यह निर्धारित करने का अधिकार मिला कि किन डिजिटल पेमेंट पर फीस नहीं ली जाएगी।


सरकार का तर्क है कि UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के साथ सिस्टम की सुरक्षा, साइबर फ्रॉड से बचाव, तकनीकी अपग्रेड और पेमेंट नेटवर्क को मजबूत बनाए रखने पर लगातार खर्च होता है।


क्या UPI अब महंगा होने वाला है?

सरकार ने UPI को आम यूजर के लिए महंगा करने की बात नहीं कही है। उसकी नीति के मुताबिक सामान्य यूजर के लिए UPI पेमेंट मुफ्त रखने की व्यवस्था जारी रहेगी। भविष्य में बड़े मर्चेंट पेमेंट को लेकर कोई शुल्क व्यवस्था बनती है तो उसकी सीमा और दर सरकार के अगले नियमों से तय होगी।


15 सितंबर के नोटिफिकेशन में क्या साफ हुआ?

वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी कर ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर किसी भी तरह का डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चार्ज नहीं लगाने की स्थिति स्पष्ट की। इसमें RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट को भी इस दायरे में रखा गया है।


आम यूजर पर कितना असर पड़ेगा?

रोजमर्रा में छोटे UPI पेमेंट करने वालों के लिए तत्काल कोई बदलाव नहीं है। सामान्य खरीदारी और व्यक्ति से व्यक्ति पैसे भेजने वाले यूजर्स के लिए मौजूदा स्थिति बनी हुई है। बड़े मर्चेंट पेमेंट करने वालों को आगे सरकार के नियमों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि ₹2,000 से ऊपर के चुनिंदा कारोबारी पेमेंट के लिए भविष्य की व्यवस्था अभी तय नहीं है।


UPI आखिर काम कैसे करता है?

UPI इस्तेमाल करने के लिए यूजर को एक Virtual Payment Address (UPI ID) बनाना होता है, जिसे बैंक अकाउंट से लिंक किया जाता है।


इसके बाद हर पेमेंट के लिए बैंक अकाउंट नंबर, बैंक का नाम या IFSC कोड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती। मोबाइल नंबर, UPI ID या उपलब्ध पहचान के आधार पर पेमेंट रिक्वेस्ट प्रोसेस की जा सकती है।


UPI से सिर्फ पैसे भेजना ही नहीं

UPI के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के साथ कई दूसरे डिजिटल पेमेंट भी किए जा सकते हैं।

यूटिलिटी बिल का भुगतान

ऑनलाइन शॉपिंग

दुकानों पर खरीदारी

अन्य डिजिटल पेमेंट


इन कामों के लिए हर बार नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड की जरूरत नहीं पड़ती।


जुलाई 2026 तक 741 बैंक UPI से जुड़े

UPI का नेटवर्क देश में काफी बड़ा हो चुका है। जुलाई 2026 तक 741 बैंक UPI से जुड़े थे।


सिर्फ जुलाई में करीब 2,366 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए। इनकी कुल रकम लगभग ₹29.88 लाख करोड़ रही।


डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी 84%

वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कुल डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी करीब 84% रही। इसका इस्तेमाल छोटे दुकानदारों से लेकर ऑनलाइन खरीदारी और बड़े कारोबारी भुगतान तक हो रहा है। इसी वजह से UPI भारत के रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट का प्रमुख माध्यम बन चुका है।


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