
वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष के सातवें दिन गंगा सप्तमी 8 मई रविवार को रहेगी। इस पर्व पर गंगा स्नान, व्रत पूजा और दान का विशेष महत्व है। जो लोग किसी कारण से इस दिन गंगा नदी में स्नान नहीं कर सकते वो घर पर ही पानी में गंगा जल मिलाकर नहा सकते हैं, ऐसा करने से तीर्थ स्नान का ही पुण्य मिलता है। वहीं इस दिन पानी से भरी मटकी का दान करने से कभी न खत्म होने वाला पुण्य मिलता है।
स्थिति पर दोबारा प्रकट हुई गंगा
महर्षि जह्नु जब तपस्या कर रहे थे तब गंगा नदी के पानी की आवाज से बार-बार उनका ध्यान भटक रहा था। इसलिए उन्होंने गुस्से में आकर अपने तब केबल से गंगा को पी लिया था, लेकिन बाद में अपने दाएं कान से गंगा को पृथ्वी पर छोड़ दिया था। इसलिए ये गंगा के प्राकट्य का दिन भी माना जाता है। तभी से गंगा का नाम जह्नवी पड़ा।
यह 10 पाप खत्म हो सकते हैं गंगा स्नान से
वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर गंगा नदी में स्नान करने से पाप का नाश होता है और अनंत पुण्य फल मिलता है। इस दिन गंगा स्नान करने से 10 तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। स्मृति ग्रंथ में 10 प्रकार के पाप बताए गए हैं कायिक, वाचिका और मानसिक। इसके अनुसार किसी दूसरे की वस्तु लेना, शत्रुओं में बताई हिंसा कराना, पराई स्त्री के पास जाना है। ये 3 तरह के कायिक यानी शारीरिक पाप है। वाचिक पाप में कड़वा और झूठ बोलना, पीठ पीछे किसी की बुराई करना और फालतू बातें करना इसके अलावा दूसरों की चीजों को अन्याय से लेने का विचार करना, किसी का बुरा करने की इच्छा मन में रखना और गलत कामों के लिए जिद करना ये 3 तरह के मानसिक पाप होते हैं।
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