शनिवार, 07 मार्च 2026
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मंगलवार के दिन करें संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ, होंगे सभी कष्ट दूर
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मंगलवार के दिन करें संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ, होंगे सभी कष्ट दूर

मंगलवार के दिन करें संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ, होंगे सभी कष्ट दूर

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डेस्क रिपोर्टर

आज मंगलवार का दिन है यानी संकटमोचन हनुमान का दिन। आज का दिन हनुमान जी की आराधना के लिए सम​र्पित है। आज हनुमान जी की पूजा पाठ करने से भगवान हनुमान प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्टों को दूर कर देते है। मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा में सिंदूर का चोला, लाल फूल, चमेली का तेल, लाल लंगोट, लड्डू आदि शामिल की जाती है। आज आप स्नान के बाद राम भक्त हनुमान जी की पूजा करें और उनके संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ जरूर करें। गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसकी रचना की थी। हनुमानाष्टक का पाठ करने से मनुष्य को कई तरह के लाभ मिलते हैं। मंगलवार के दिन हनुमानाष्टक का पाठ करने से सभी कार्य में सफलता भी मिलती है। जीवन के सभी दर्द दुख दूर होते हैं, इसके साथ ही आने वाले सभी संकट टल जाते हैं, डर लगना बंद हो जाता है। तो चलिए जानते हैं संकटमोचन हनुमानाष्टक के बारे में..



संकटमोचन हनुमानाष्टक

बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों।

ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो।


देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो।

को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥


बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो।

चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो।।


कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो।

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो।।


जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो।

हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥


रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो।।


चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो।

बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो।।


लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।

आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो।।


रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो।

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो।।



आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो।

बंधू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो।।


देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो।

जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो।।


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