
भोपाल। होली का उल्लास शुरू होने वाला है, क्योंकि 8 मार्च से होलाष्टक प्रारंभ हो जाएगा। होलाष्टक के साथ ही होली पर्व की तैयारियां भी जोरों पर शुरू हो जाएंगी। इस बार 13 मार्च को होलिका दहन होगा, लेकिन भद्रा के कारण दहन का सही समय महत्वपूर्ण रहेगा।
होलिका दहन पर रहेगा भद्रा का प्रभाव
इस बार सुबह 10:35 बजे से रात 11:26 बजे तक भद्रा का वास रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना शुभ माना जाता है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में प्रदोष काल में भी होलिका दहन किया जा सकता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, धृति योग और शश योग का संयोग रहेगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या है होलाष्टक और इसका प्रभाव?
होली से आठ दिन पहले का समय "होलाष्टक" कहलाता है। उत्तर भारत के कई राज्यों में होलाष्टक के दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
हालांकि, मध्यभारत में होलाष्टक का दोष नहीं माना जाता। पं. गंगाप्रसाद आचार्य के अनुसार, होलाष्टक का दोष केवल सतलुज, रावी, व्यास, सिंधु और झेलम नदियों के किनारे बसे राज्यों जैसे पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में मान्य है।
ग्रह-नक्षत्रों के शुभ संयोग से रहेगा विशेष प्रभाव
13 मार्च को सूर्य और शनि दोनों कुंभ राशि में रहेंगे। शनि इस दिन अपनी स्वराशि कुंभ में होगा, जिससे देश-दुनिया के लिए यह संयोग शुभ साबित होगा।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
भद्रा का समय: सुबह 10:35 बजे से रात 11:26 बजे तक
होलिका दहन का शुभ समय: रात 11:26 बजे के बाद
विशेष योग: पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, धृति योग, शश योग
क्या करें और क्या न करें?
✅ भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करें।
✅ होलिका दहन से पहले पूजा और हवन करें।
❌ भद्रा के दौरान होलिका दहन करने से बचें, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है।
✅ ग्रह-नक्षत्रों की शुभ स्थिति का लाभ उठाने के लिए दान-पुण्य करें।
इस बार होली का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण बेहद शुभ माना जा रहा है। ऐसे में सही समय पर होलिका दहन कर सुख-समृद्धि की कामना करें।
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