
इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर आम लोगों और भक्तों में तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। लेकिन राजस्थान पत्रिका द्वारा शहर के विद्वान पंडितों से बातचीत के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि 16 अगस्त शनिवार को ही जन्माष्टमी का पर्व मनाना उचित होगा।
3 दिन की लंबी छुट्टियां: त्योहार और आजादी का संगम
➡️ 15 अगस्त शुक्रवार: स्वतंत्रता दिवस
➡️ 16 अगस्त शनिवार: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
➡️ 17 अगस्त रविवार: साप्ताहिक अवकाश + गोगा नवमी
इस बार लोगों को लगातार तीन दिन की छुट्टियों का लाभ मिलेगा, जिससे धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ पारिवारिक यात्राएं भी संभव होंगी।
जानें तिथि और नक्षत्र के अनुसार पर्व क्यों 16 अगस्त को
पंडितों के अनुसार,
➡️ अष्टमी तिथि प्रारंभ: 15 अगस्त, रात 11:49 बजे
➡️ अष्टमी तिथि समाप्त: 16 अगस्त, रात 9:34 बजे
➡️ चूंकि अष्टमी तिथि का सूर्योदय 16 अगस्त को हो रहा है, इसलिए उदयातिथि के आधार पर जन्माष्टमी 16 अगस्त को ही मान्य है।
➡️ रोहिणी नक्षत्र इस बार जन्म के समय नहीं रहेगा, लेकिन फिर भी धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत और पूजन 16 अगस्त को ही किया जाएगा।
उपवास भी 16 अगस्त को ही रखें
पंडित कृष्णकांत शास्त्री और अन्य विद्वानों का कहना है कि उद्यत अष्टमी तिथि के आधार पर ही व्रत और पूजन करना चाहिए। अतः जन्माष्टमी व्रत 16 अगस्त शनिवार को ही रखें।
गोगा नवमी 17 अगस्त को
अगले दिन रविवार, 17 अगस्त को गोगा नवमी का पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व विशेष रूप से सर्प पूजन से जुड़ा होता है और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी विशेष मान्यता है।
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