महाशिवरात्रि का पर्व 01 मार्च को मनाया जाएगा। यह दिन रुद्राक्ष धारण करने के लिए शुभ दिन माना जाता है। रुद्राक्ष का सीधा सा संबंध भोलेनाथ से है और इसे बेहद चमत्कारी भी माना जाता है। भोलेनाथ के मंत्रों का जाप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का ही प्रयोग किया जाता हैं। रुद्राक्ष धारण करने से सभी प्राकार के संकट मिटते हैं। साथ ही दुख और ग्रह दोष खत्म होता हैं, जीवन में सुख, समृद्धि, धन, संपत्ति सबकुछ मिलता हैं। पर हां इसको धारण करने के भी कुछ नियम होते हैं। चलिए महाशिवरात्रि के पर्व पर जानते हैं कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई थी।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव एक बार हजार वर्ष तक साधना में लीन थे। एक दिन जब अचानक उनकी आंखें खुलीं तो उनकी आंखों से आंसू की एक बूंद पृथ्वी पर गिर गई। इसी से ही रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई थी। रुद्राक्ष के पेड़ शिव कि आज्ञा और मानव कल्याण के लिए पूरी धरती पर फैल गाए। यही कारण है कि रुद्राक्ष को इतना चमत्कारी और प्रभावी माना जाता है।
जानिए रुद्राक्ष के प्रकार
रुद्राक्ष एक से 21 मुखी तक के होते हैं। जिसमे से 11मुखी रुद्राक्ष को सर्वसिद्ध रुद्राक्ष कहां जाता है। तो चलिए जानते हैं रुद्राक्ष के कुछ प्रमुख प्रकार के बारे में...
एक मुखी रुद्राक्ष- शिव स्वरुप रुद्राक्ष कहलाता है
दो मुखी रुद्राक्ष- अर्धनारीश्वर स्वरुप
तीन मुखी रुद्राक्ष- अग्नि और तेज स्वरुप
चार मुखी रुद्राक्ष- ब्रह्म स्वरुप रुद्राक्ष
पांच मुखी रुद्राक्ष- कालाग्नि स्वरुप रुद्राक्ष
छह मुखी रुद्राक्ष- भगवान कार्तिकेय स्वरुप रुद्राक्ष
सात मुखी रुद्राक्ष- सप्तऋषियों का स्वरुप रुद्राक्ष
आठ मुखी रुद्राक्ष- अष्ट देवियों का स्वरुप रुद्राक्ष
नौ मुखी रुद्राक्ष- धन, संपत्ति, यश और कीर्ति के लिए धारण करते हैं
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