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डेस्क रिपोर्टर
नवरात्र का त्योहार हिंदू धर्म में बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि के 9 दिन मां के नौ रूपों को पूजा पाठ की जाती है। साल भर में चार नवरात्रि पड़ती हैं इनमें से दो गुप्त नवरात्रि बोली जाती है। यह नवरात्रि आषाढ़ और पौष महीने में पड़ती हैं। वहीं चैत्र महीने मे आने वाली नवरात्रि को बड़ी नवरात्रि कहा जाता है साथ ही अश्विन माह में पड़ने वाली नवरात्रि को छोटी नवरात्रि बोलते है। नवरात्रि कोई सी भी क्यों न हो भक्त इस पर्व को बड़ी ही धूमधाम और श्रद्धा भक्ति के साथ मनाते है। इस पर्व पर माता के भक्त अखंड ज्योति को प्रज्वलित करते हैं।
अखंड ज्योति का अर्थ ऐसी ज्योति से है जो खंडित न हो। यानी वो ज्योति जिसकी अखंड ज्योत निरंतर जलती रहे। नवरात्रि में अखंड ज्योति का बहुत ज्यादा महत्त्व होता है। नवरात्रि के वक्त अखंड ज्योत का बुझना अशुभ माना होता है। जहां भी इस ज्योति को जलाया जाता है वहां इसके समक्ष किसी न किसी व्यक्ति को हर वक्त उपस्थित होना जरूरी होता है।
बतादें कि, अखंड ज्योत में दीपक की लो बाएं से दाएं की और जलनी चाहिए। इस तरह से जलता हुआ दीपक आर्थिक संपन्नता का सूचक बताया जाता है। दीपक का तापमान दीपक से 4 उंगली चारों तरफ अनुभव होना चाहिए। ऐसा कहां जाता है कि, इस प्रकार का दीपक मनुष्य का भाग्योदय लाता है।
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