N
डेस्क रिपोर्टर
25 मार्च, दिन शुक्रवार को शीतला अष्टमी का व्रत आने वाला है। शीतला अष्टमी और बसोड़ा के दिन माता शीतला की विधि विधान से पूजा अर्चना करना चाहिए। शीतला माता को अक्षत्, दीप, धूप, रोली, गंध, सिंदूर, फूल, कुमकुम, फल आदि चढ़ाना चाहिए। इसके बाद आप शीतला माता की कथा का श्रवण करें। वहीं सप्तमी के दिन बनाए गए पकवानों का माता को भोग लगाएं। बतादें कि माता शीतला को बासी पकवान के भोग लगाए जाते हैं। शीतला माता की कृपा से मनुष्य के चर्म रोग, कष्ट, ज्वर आदि दूर होते है। पूजा के अंत में आप शीतला माता की आरती विधिपूर्वक करें। इसके लिए आप घी के दीपक या फिर कपूर का उपयोग करें।
शीतला माता की आरती
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता।
जय शीतला माता…
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता,
ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता।
जय शीतला माता…
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,
वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता।
जय शीतला माता…
इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा,
सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता।
जय शीतला माता…
घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,
करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता।
जय शीतला माता…
ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,
भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता।
जय शीतला माता…
जो भी ध्यान लगावें प्रेम भक्ति लाता,
सकल मनोरथ पावें भवनिधि तर जाता।
जय शीतला माता…
रोगन से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,
कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता।
जय शीतला माता…
बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता,
ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता।
जय शीतला माता…
शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता,
उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता।
जय शीतला माता…
दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता,
भक्ति आपनी दीजे और न कुछ भाता।
जय शीतला माता…
शीतला माता की जय हो!!!
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

