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डेस्क रिपोर्टर
हिन्दू धर्म में कई सारे देवी देवताओं की पूजा पाठ की जाती है। इन सभी देवताओं का अपना अपना स्थान है। आज सोमवार का दिन है आज का दिन भगवान शिव को समर्पित हैं। कहां जाता है कि आज के दिन भगवान शिव की पूजा पाठ कर व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। भगवान शिव को सभी देवताओं में से एक माना गया हैं। सनातन धर्म में भगवान शिव को अनेकों नामों से पुकारा जाता है। जिनमें से शंकर, भोलेनाथ, आदिदेव, रूद्र, महेश, गंगाधर, नीलकंठ आदि नामों से बुलाया जाता हैं। पुराणों के मुताबिक भोलेनाथ स्वयंभू है, इसके बाद भी भगवान शंकर के जन्म से जुडी कई सारी रहस्यमई कहानियां हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो मनुष्य अपनी पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शंकर की उपासना करता है उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है। इसके साथ ही भगवान शिव उस पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। आज हम आपको भगवान शंकर के बारे में ऐसी कई बातें बतांगे जो सामान्यत: आम व्यक्तियों को नहीं पता है। तो चलिए जानते है कुछ रहस्यों के बारे में….
पुराणों के मुताबिक जालंधर नाम के राक्षस की उत्पत्ति भगवान शिव के तेज से हुई थी। इसलिए उसे पुराणों में भगवान शिव का ही एक अंश माना गया। वहीं एक और राक्षस भूमा की उत्पत्ति भगवान शिव के माथे के पसीने की एक बूंद से हुई थी।
कुछ पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि भगवान शिव के कार्तिके और गणेश के अलावा भी दो और पुत्र थे। जिनका नाम अंधक और खुजा हैं। पर धर्म शास्त्रों में इन दोनों पुत्र का कहीं कोई उल्लेख नहीं हुआ है।
सप्तऋषियों को भगवान शिव के प्रारंभिक शिष्य माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि सप्तऋषियों के उससे ही पृथ्वी पर भगवान शंकर के ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया था।
कुछ लोग शंकर और शिव को एक ही सत्ता के दो नाम मानते हैं। पर तस्वीरों में इन दोनों की आकृति अलग है। बतादें कि कुछ तस्वीरों में भगवान शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए चित्रित किया गया है।
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