आज गुरुवार है यानी भगवान विष्णु का दिन, है दिन भगवान विष्णु कि भक्ति और पूजा के लिए समर्पित है। भगवान विष्णु को पिला रंग बेहद प्रिय है, ऐसे में आप केला, पीले वस्त्र, पीले फूल, चने की दाल, गुड़ आदि चढ़ाया जाता है। इसके साथ ही केले के पौधे की पूजा भी की जाती है। पूजा के वक्त आपको भगवान विष्णु की आरती कर उनकी पूजा अर्चना करनी चाहिए। आरती आपकी पूजा में हुई कमी को पूरा कर देती हैं इस आरती में भगवान विष्णु की महिमा का गुणगान किया गया है, आरती के लिए मुख्यत: लोग कपूर या फिर घी के दीपक का यूज करते हैं। शुभ कार्यों के लिए घी का दीपक उत्तम माना जाता है। आज आप सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करें। इसके साथ ही अंत में उनकी आरती करें।
करें भगवान विष्णु की आरती
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ओम जय जगदीश हरे…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ओम जय जगदीश हरे…
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ओम जय जगदीश हरे…
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ओम जय जगदीश हरे…
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ओम जय जगदीश हरे…
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ओम जय जगदीश हरे…
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