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इस लिए बुधवार को होती है भगवान गणेश की पूजा, जानें गजानन के बारे में 5 रोचक बातें
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बुधवार को क्यों होती है भगवान गणेश की पूजा, जानें गजानन के बारे में 5 रोचक बातें

बुधवार को क्यों होती है भगवान गणेश की पूजा, जानें गजानन के बारे में 5 रोचक बातें

News World Desk
डेस्क रिपोर्टर
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भगवान गणेश का स्मरण किसी मंगल कार्य का आरम्भ करने से पहले किया जाता है। माना जाता है कि अगर आपके किसी काम में बार-बार बाधा आ रही हो, तो भगवान गणेश का नाम लेना चाहिए। इससे आपके कार्यों में आने वाली बाधा हट जाती है। भगवान गणेश को मंगल और समृद्धि का देवता माना जाता है। बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। आप अगर किसी नई चीज का आरम्भ करना चाहते हैं, तो आप बुधवार के दिन भगवान गणेश का नाम लेकर उसकी शुरुआत कर सकते हैं। भगवान गणेश से ऐसी बहुत-सी खास बातें जुड़ी हुई हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आइए, जानते हैं कौन-सी हैं वे बातें।


बुधवार के दिन क्यों की जाती है श्री गणेश की पूजा

भगवान गणेश की पूजा बुधवार के दिन करने से एक कहानी जुड़ी हुई है। माना जाता है कि माता पार्वती ने जिस दिन भगवान गणेश को निर्मित किया था, उस दिन कैलाश पर बुधदेव भी उपस्थित थे। बुधदेव ने जब विनायक के दर्शन किए, तो उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक अपना दिन यानी बुधवार को भगवान गणेश को समर्पित कर दिया। इस कारण बुध ग्रह के प्रतिनिधि दिन बुधवार के दिन श्री गणेश की पूजा की जाती है।


भगवान गणेश ने 3 साल तक लिखी थी महाभारत

माना जाता है कि गणेश जी केवल बुद्धि और मंगल कार्यों के ही देवता नहीं है बल्कि भगवान गणेश की लेखन गति भी बहुत तेज थी। यही कारण था कि वेदव्यास ने महाभारत को लिखने के लिए गणेश जी को चुना था। जिस महाभारत को लिखने में कोई और देवता सदियां लगा देता, उस महाभारत को वेदव्यास के कहने पर गणेश जी ने लिखा था। भगवान गणेश को पूरी महाभारत लिखने में तीन साल का समय लग गया था।


गणेश जी के दर्शन सामने से ही करें

मान्यता है कि गणेश जी के पीछे पीठ की तरफ दरिद्रता का वास होता है इसलिए हमेशा सामने से ही गणेश जी के दर्शन करने चाहिए। आप मंदिर से बाहर निकल रहे हैं, तो हाथ जोड़कर पीछे कदम हटाते हुए सामने हाथ जोड़कर बाहर निकलें।


माता लक्ष्मी के दत्तक पुत्र हैं भगवान गणेश

माता लक्ष्मी के कोई संतान नहीं थी। इस कारण से एक दिन माता लक्ष्मी बहुत दुखी थीं। जब यह बात माता पार्वती को पता चली, तो उन्होंने बालक गणेश को माता लक्ष्मी की गोद में बैठाकर कहा कि गणेश भी माता लक्ष्मी का ही पुत्र है। यह सुनकर माता लक्ष्मी बहुत प्रसन्न हुईं और उन्होंने कहा कि जब तक कोई उनके साथ भगवान गणेश की पूजा नहीं करेगा, उस मनुष्य के जीवन में कभी भी सुख- समृद्धि और लक्ष्मी नहीं आएगी। तब से भगवान गणेश की पूजा लक्ष्मी जी के साथ भी की जाती है।


माता-पिता के चरणों में होता है पूरा संसार

भगवान गणेश के बड़े भाई का नाम कार्तिकेय था। एक दिन कैलाश पर बात हुई कि जो सबसे पहले संसार का पूरा एक चक्कर लगाकर वापस कैलाश में लौट आएगा, वो देवी पार्वती और भगवान शिव से सबसे ज्यादा प्रेम करता होता। यह सुनकर कार्तिकेय संसार का चक्कर लगाने के लिए चल दिए जबकि गणेश जी ने अपने माता-पिता के चक्कर लगाकर कहा कि माता-पिता के चारों तरफ पूरा संसार होता है, इसलिए उनके संसार का एक चक्कर पहले ही हो चुका है। इस तरह भगवान गणेश ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया।

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