आज मंगलवार का दिन है यानी पवनपुत्र हनुमान का दिन, इस दिन को बजरंगबली की पूजा करने के लिए उत्तम माना जाता है। इस महावीर हनुमान का जन्म हुआ था। संकटमोचन कृपा जिस भी किसी व्यक्ति पर हो जाती है, उसे कभी कोई भय, दुख, रोग, कष्ट या फिर संकट नहीं रहता है। बतादें कि रामभक्त हनुमान जी को कलयुग के जाग्रत देव कहां जाता है। इस काल में आप उनकी पूजा करके अपने जीवन का कल्याण कर सकते है। आज हनुमान जी कि पूजा कर आप उनकी विधिपूर्वक आरती करें।
आरती की विधि
आपको हर दिन या फिर मंगलवार और शनिवार को सुबह और शाम के वक्त हनुमान जी की आरती करें।
अगर सुबह में समय का अभाव होता है तो आप आरती प्रदोष काल में करें। इसके साथ ही जब सूर्य ढल रहा हो और शाम होने ही वाली हो, उस वक्त हनुमान जी की आरती करें।
ध्यान दें की आरती का उच्चारण शुद्ध हो।
आप आरती के लिए घी के दीपक या फिर कपूर का उपयोग करें।
हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई।
सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज सवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि संजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पाताल तोरि जम-कारे।
अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुरदल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमानजी की आरती गावे।
बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥
कर्पूरगौरं मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
आरती का समापन कर्पूरगौरं मंत्र से किया जाता है. इसके बाद हनुमान जी की जयकारा लगाएं.
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