हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता हैं। फाल्गुन माह का आज कालाष्टमी व्रत है। इस दिन भगवान भोलेनाथ के अवतार काल भैरव की पूजा पाठ की जाती है। काल भैरव की पूजा अर्चना करने से भय, अवसाद, नकारात्मकता दूर होती है। साथ ही साहस एवं पराक्रम में वृद्धि होती हैं। कुंडली में व्याप्त राहु और शनि की बाधा से मुक्ति पाने के लिए भी काल भैरव की पूजा की जाती है। तो चलिए आइए जानते हैं कालाष्टमी व्रत की पूजा विधि और मुहूर्त के बारे में।
क्या है कालाष्टमी का पूजा मुहूर्त
कालभैरव की पूजा रात्रि प्रहर के दौरान ही करने का विधान है। आज सुबह 06 बजकर 52 मिनट से ही रवि योग शुरू हो गया है। साथ ही दोपहर 02 बजकर 41 मिनट पर सर्वार्थ सिद्धि योग लगेगा। ये योग पूजा पाठ के लिए ठीक हैं।
कालाष्टमी पूजा कि विधि
भगवान भोलेनाथ के मंदिर में जाकर आप विधिपूर्वक शिव जी की पूजा पाठ करें। अगर आपके आस पास काल भैरव का मंदिर है, तो आप वहां जाकर शाम को काल भैरव को चौमुखा दीप अर्पित करें। साथ ही उनको जलेबी, फूल, नारियल, पान, इमरती आदि चढ़ाएं। इसके बाद सच्चे मन से काल भैरव किचालीसा का पाठ करें। आखिर में काल भैरव की आरती करें। इसके साथ ही क्षमा प्रार्थना मंत्र भी पढ़ें। अब आपकी जो भी मनोकामना है उसे काल भैरव के समक्ष रखे।
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