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‘सपनों की कीमत मेहनत से चुकानी होती हैं, जूनून हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं’, कव‍िता सेठ ने बताई अपने संघर्ष की कहानी
04 दिस, 2025 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
‘मुंबई में भूख भी लगी, मंज़िल भी दिखी’… कव‍िता सेठ के संघर्ष की कहानी सुनकर हो जाएंगे इमोशनल!

‘मुंबई में भूख भी लगी, मंज़िल भी दिखी’… कव‍िता सेठ के संघर्ष की कहानी सुनकर हो जाएंगे इमोशनल!

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। वो आवाज़… जो दिल के तार छेड़ देती है और दर्द को भी संगीत में ढाल देती है। ‘इकतारा’, ‘मोरा पिया’ और ‘तुम ही बंधु’ से लोगों के दिलों पर राज करने वाली सिंगर कविता सेठ जब मंच पर आती हैं तो खामोशी भी बोलने लगती है। चंदेरी ग्रेट फेस्टिवल सीजन-3 में पहुंचीं कविता सेठ ने News World से खास बातचीत में अपने संघर्ष, सफलता और संगीत के सफर के अनसुने किस्से साझा किए।


बचपन से संगीत का जुनून, मुंबई बुला ले गया सपना

कविता सेठ कहती हैं, “संगीत के लिए मेरी बचपन से ही बहुत दीवानगी थी, इसलिए मैं इस रास्ते पर चल पड़ी और मुंबई पहुंच गई।” उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से मुंबई का सफर आसान नहीं था। नई जगह, नया शहर और कोई सहारा नहीं—इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।


संघर्ष हर किसी की जर्नी का पड़ाव होता है

अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए कविता सेठ कहती हैं, “लाइफ में कई बार मुश्किलें भी आईं, पर मैंने सामना किया और डटी रही। कभी हार नहीं मानी।” उनका मानना है कि संघर्ष सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि सीखने की सबसे मजबूत सीढ़ी होता है।


‘इकतारा’ बना करियर का टर्निंग पॉइंट

कविता सेठ के मुताबिक, “‘इकतारा’ मेरे करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।” इस गाने ने उन्हें पहचान दी और इंडस्ट्री में उनका नाम मजबूती से दर्ज कर दिया। इसके बाद ‘मोरा पिया’, ‘रंगसारी’, ‘छाप तिलक सब छीनी’ और ‘तुम ही बंधु सखा तुम ही हो’ जैसे कई सुपरहिट गाने उनकी झोली में आए।


हार्डवर्क का कोई शॉर्टकट नहीं

युवा कलाकारों को संदेश देते हुए कविता सेठ ने कहा, “मुझे लगता है आपका जो जुनून होता है, उसके सामने कुछ भी मायने नहीं रखता जब तक आप अपने लक्ष्य को पा नहीं लेते। हार्डवर्क का कोई शॉर्टकट नहीं होता।जूनून हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं।” उन्होंने कहा कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती, इसके लिए लगातार मेहनत और धैर्य जरूरी है।


चंदेरी ग्रेट फेस्टिवल में बिखेरा सुरों का जादू

चंदेरी ग्रेट फेस्टिवल सीजन-3 में कविता सेठ ने जब मंच संभाला तो हर तरफ सुरों की बरसात हो गई। दर्शकों ने ‘मोरा पिया’ पर तालियों की गूंज से उनका स्वागत किया और ‘इकतारा’ पर पूरा माहौल भावुक हो उठा।


संगीत सिर्फ पेशा नहीं, मेरी साधना है

अपनी कला को लेकर कविता सेठ कहती हैं, “मेरे लिए संगीत सिर्फ पेशा नहीं, साधना है। हर गीत में मैं अपने दिल का एक हिस्सा देती हूं।” यही वजह है कि उनकी आवाज़ लोगों के दिलों तक सीधे पहुंचती है।

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