
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, लेखक और निर्देशक मनोज कुमार का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अपनी विशिष्ट अभिनय शैली और देशभक्ति से ओतप्रोत फिल्मों के कारण उन्हें "भारत कुमार" के नाम से जाना जाता था। उनकी अद्वितीय सिनेमाई विरासत ने भारतीय फिल्म उद्योग को अमिट छाप दी है।
फिल्मी सफर की शुरुआत
मनोज कुमार ने 1957 में एक फैशन ब्रांड के माध्यम से अपना स्क्रीन डेब्यू किया, जबकि 1958 में फिल्म "सहारा" में एक छोटे किरदार से बड़े पर्दे पर कदम रखा। 1960 में रिलीज हुई "कांच की गुड़िया" उनकी पहली मुख्य भूमिका वाली फिल्म थी, जिसने उन्हें पहचान दिलाई।
मध्य प्रदेश से गहरा नाता
मनोज कुमार की कई फिल्मों की शूटिंग मध्य प्रदेश (MP) में हुई, जो सुपरहिट साबित हुईं। उनकी फिल्मों ने न केवल देशभक्ति की भावना को मजबूत किया बल्कि उन्हें रोमांटिक हीरो के रूप में भी स्थापित किया। थिएटरों में उनकी फिल्मों को देखने के लिए दर्शकों की भीड़ उमड़ती थी।
एमपी में शूट की गईं मनोज कुमार की ब्लॉकबस्टर फिल्में
उपकार
हरियाली और रास्ता
वो कौन थी
हिमालय की गोद में
पत्थर के सनम
नील कमल
पूरब और पश्चिम
रोटी, कपड़ा और मकान
दो बदन
क्रांति
मनोज कुमार और जया बच्चन का किस्सा
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की बेटी जया बच्चन और मनोज कुमार के बीच एक दिलचस्प किस्सा सुर्खियों में रहा। सेट पर किसी बात को लेकर अनबन के चलते जया बच्चन ने मनोज कुमार को "गुंडा" तक कह दिया था। जया अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं और उन्होंने अपने को-स्टार को सेट पर ही खरी-खोटी सुना दी थी।
लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन
मनोज कुमार लंबे समय से हृदय संबंधी समस्याओं और डीकंपेंसेटेड लिवर सिरोसिस से जूझ रहे थे। उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके योगदान को सिनेमा जगत में हमेशा याद रखा जाएगा।
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