
हाल ही में सीनियर एक्ट्रेस जयाप्रदा जी के साथ मेरी नई वेब सीरीज फातिमा रिलीज हुई है।उनके साथ काम करने में बहुत मजा आया, उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला,ऐसा लगा ही नहीं कि वह इतनी सीनियर एक्ट्रेस है। वह बहुत ही अच्छी और बहुत ही हेल्पफुल नेचर की है। वह जिस तरह से टाइम टू टाइम आकर अपना हर काम करती थी उनसे टाइम मैनेजमेंट भी सीखने को मिलता है तो यह एक डिसिप्लिन हर कलाकार के लिए बहुत जरूरी है। मेरा यह मानना है कि आप किसी भी फील्ड में क्यों ना हो लेकिन आपको वक्त की कद्र होनी चाहिए। यह कहना है ‛क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ ‛कभी सौतन कभी सहेली’ ‛केसर’ ‛कसौटी जिंदगी की’ ‛पवित्र रिश्ता’ और ‛बालिका वधू’ जैसे लोकप्रिय सीरियलों में शानदार अभिनय की छाप छोड़ने वाले और बड़े पर्दे पर ‛कृष्णा कॉटेज’ ‛अनवर’ ‛एंटरटेनमेंट’ ‛जॉगर्स पार्क’ ‛कलंक’ और ‛अनकही’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाले ‛हितेन तेजवानी’ का। हितेन भोपाल में थ्रिलर वेब सीरीज ‛भयमकाल’ की शूटिंग के लिए पहुंचे थे। इस दौरान ‛न्यूज़ वर्ल्ड’ से खास बातचीत में उन्होंने अपने अभिनय का सफर साझा किया।
एक्टिंग के लिए जगह नहीं मिली तो एडिटिंग भी की
फिल्मों की चमचमाती दुनिया दूर से जितनी अच्छी लगती है, उस तक पहुंचने का सफर भी उतना ही कठिन है। मैंने कालेज के दिनों में थिएटर तो शुरु किया था और अभिनय में उतर रहा था, लेकिन फिल्मों में जाने का सपना तब भी काफी दूर दिखाई देता था। एक्टिंग के लिए जगह नहीं मिली तो एडिटिंग का काम शुरु किया ताकि किसी तरह से उस सेटअप तक पहुंच पाऊं, लेकिन तब भी बात नहीं बन सकी थी। तब भी मैंने हार नहीं मानी और लगातार आडिशन देकर अपने लिए जगह बनाई।
थिएटर से अभिनय में जगी रुचि
दसवीं तक मैंने अपने करियर को लेकर कुछ भी निर्धारित नहीं किया था। लेकिन कालेज में थियेटर शुरु करने के बाद अभिनय में रुचि पैदा हुई और सोचा कि अब यही अपनी फील्ड बनाउंगा। कालेज में थियेटर करने से मेरे मन से स्टेज का डर निकल गया था। वहां से रियल एक्टिंग सीखी, क्योंकि थिएटर में आपको सिर्फ एक चांस मिलता है। वहां कोई कट या री-टेक की व्यवस्था नहीं होती, जिससे आपको पहले प्रयास में बेस्ट देना होता है।
ओटीटी ने थिएटर के कलाकारों को दिया सुनहरा अवसर
जब मैंने टीवी शुरु की थी, तब से आज तक समय के साथ काफी बदलाव हुए हैं। विशेष तौर पर स्टोरी टेलिंग का तरीका बदला है। यूं तो दो दशक पहले सास-बहू के सीरियल हुआ करते थे और आज भी ये सीरियल होते हैं, लेकिन कहानी का तरीका बदला है। वहीं ओटीटी एक ऐसा प्लेटफार्म है, जिसने थिएटर के कलाकारों को सुनहरा अवसर दिया है। थियेटर में कलाकार रियल एक्टिंग सीखता है और ओटीटी में रियल एक्टिंग की ही डिमांड होती है। यहां लार्जर देन लाइफ की बजाए, आम व्यक्ति से जुड़े कैरेक्टर ज्यादा गहराई से प्रस्तुत करना होते हैं।
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