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नहीं रहीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर, 6 दशकों से भी ज्यादा चला स्वरों का जादू, मध्य प्रदेश से भी रहा है नाता
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नहीं रहीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर, 6 दशकों से भी ज्यादा चला स्वरों का जादू, मध्य प्रदेश से भी रहा है नाता

नहीं रहीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर, 6 दशकों से भी ज्यादा चला स्वरों का जादू, मध्य प्रदेश से भी रहा है नाता

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डेस्क रिपोर्टर
मुंबई, न्यूज वर्ल्ड डेस्क। 6 फरवरी 2022 की सुबह संगीत प्रेमियों और देश वासियों के लिए बुरी खबर लेकर आया। रविवार को एक सुरीला सफर थम गया। भारतीय संगीत के एक युग का अंत हो गया। स्वर कोकिला और भारत रत्न लतामंगेशकर अब इस दुनिया में नहीं रहीं। मुंबई के ब्रीज कैडी अस्पताल में उन्होनें अंतिम सांस ली। जहां उनका पिछले लगभग 24 दिनों से इलाज चल रहा था। लतामंगेशकर के रुप में संगीत के एक ऐसे अध्याय का अंत हो गया जिसने अपने स्वरों के जादू से न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी लोगों को मंत्र मुग्ध कर रखा था।

मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था लतामंगेशकर का जन्म
लतामंगेशकर का जन्म मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। यही कारण था कि उन्हें इंदौर से सबसे ज्यादा लगाव था। इंदौर के गोमंतक मराठा समाज परिवार में उनका जन्म हुआ। लता जी का परिवार एक मध्म वर्गीय परिवार था। लतामंगेशकर की पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर रंगमंच एलजी के कलाकार और गायक थे। हालांकि लता मंगेशकर का जन्म इंदौर में जरुर हुआ लेकिन उनकी परवरिश मराराष्ट्र में हुई। लता दीदी बचपन से ही गायिका बनना चाहती थीं। लता मंगेशकर को संगीत विरासत में मिला था। इनके परिवार में भाई हृदयनाथ मंगेशकर और बहनों में उषा मंगेशकर,मीना मंगेशकर व आशा भोसले सभी ने संगीत को ही अपनी आजीविका के लिए चुना। लता मंगेशकर चारों में सबसे बड़ी थीं।

6 दशकों से भी ज्यादा चला स्वरों का जादू
लता मंगेशकर के स्वरों का जादू लगातार 6 दशकों तक चला। ये वो दौर था जब बिना लता मंगेशकर की गीत के कोई फिल्म तैयार नहीं होती थी। उन्होने 20 भाषाओं में 30 हजार से ज्यादा गाने गाये। उन्होने फिल्मी गानों के अलावा शास्त्रीय गीत,भजन,ग़ज़ल,कव्वाली सभी तरह के गाने गाये। जब लतामंगेशकर 13 साल की थी उस समय उनके पिताजी का देहांत हो गया। भाई बहनों में सबसे बड़ी होने कारण परिवार की जिम्मेदारी का बोझ उनके कंधो पर आ गया था दूसरी तरफ उन्हें अपने करियर की तलाश भी थी.जब तक उनके पिता जीवित रहे वो नहीं चाहते थे कि वो गायिका बने, हालांकि उन्होंने सिर्फ 5 साल की उम्र में अपनी गायकी शुरु कर दी थी। 

पार्श्वगायिकी में जब कदम रखा दिग्गज गायिकाओं से था मुकाबला
1948 में जब लता जी ने पाश्वगायिकी में कदम रखा उस समय गायिकी की दुनिया में नूरजहां, अमीरबाई कर्नाटकी,शमशाद बेगम और राजकुमारी की गायकी का जादू सिर चढकर बोलता था। ऐसे में लता मंगेशकर के लिए पहचना बनाना आसान नहीं था। उनका पहला गाना एक मराठी फिल्म कीति हसाल के लिए था, मगर वो रिलीज नहीं हो पाया। शुरुआती दौर में उन्होने कुछ फिल्मों में अभिनय भी किया। लता मंगेशकर गायकी के क्षेत्र में लगतार स्थापित होने के लिए प्रयास करती रहीं,लेकिन शुरुआत में इसमें उन्हें निराशा हाथ लगी।

1949 लता जी के लिए था टर्निंग प्वाइंट
1949 में लतामंगेशकर को फिल्म महल के लिए एक गीत गाने का मौका मिला। गाना था आयेगा आनेवाला। इस गाने को उस समय की सबसे खूबसूरत और सफल व चर्चित अभिनेत्री मधुबाला पर फिल्माया जाना था। लतामंगेशकर का गाया ये गीत बहुत सफल रहा,साथ ही फिल्म भी सुपर हिट रही। इसके बाद सफलता और बुलंदियों पर जाने की जो शुरुआत हुई उसके बाद लता जी ने कभी मुड़कर नहीं देखा। इसी साल उन्होने सफल रही फिल्मों बरसात,दुलारी और अंदाज के लिए भी गीत गाये। ओपी नैयर को छोड़कर लता मंगेशकर ने हर बड़े संगीतकार के साथ काम किया। मदनमोहन की ग़ज़लें और सी रामचंद्र के भजन लोगों के मन मष्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ चुके हैं।

पचास के दशक में नूरजहां के पाकिस्तान चले जाने के बाद लता मंगेशकर ने हिन्दी फिल्म पार्श्व गायन में एकछत्र साम्राज्य स्थापित कर लिया। इसके बाद कोई ऐसी गायिका कभी नहीं आई जिसने उनके लिए कोई ठोस चुनौती पेश की हो। 

ऐसा कोई अवार्ड नहीं जो उन्हें न मिला हो
स्वर कोकिला लता मंगेशकर को संगीत या अन्य कोई ऐसा पुरुष्कार नहीं है जो उन्हें न मिला हो। उनके लिए तो ये भी कह सकते हैं कि वो पुरुष्कार,सम्मान से कहीं उपर थीं। लता जी को मिले पुरुष्कारों की फेरहिस्त बहुत लंबी हैं, लेकिन उसमें से कुछ प्रमुख पुरस्कार हैं-169 में मिला पद्म भूषण पुरस्कार, 1989 में उन्हें दादा साहेव फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया, 1999 में पद्म विभूषण उऩ्हें दिया गया और 2001 में भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न उन्हें मिला। 
ये मेरे वतन के लोगो जरा आंख में भर लो पानी जब गाया

तत्कालीन पीएम सहित लोगों की आंखे हुई नम
लता जी ने वैसे तो एक से एक बढकर गाने गाये लेकिन एक ऐसा गाना जिसे जब भी सुना जाऐ लोगों को रुला जाता है, आंखे सभी की नम हो जाती है। वो गाना है ये मेरे वतन को लोगो जरा आंख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी। ये गीत 1962 में चीन से युद्ध हारने के बाद देश का मनोबल बढाने के लिए गीतकार व कवि प्रदीप ने लिखा था। लता जी ने इस गाने का गाया और गाने की पहली लाइव प्रस्तुती दिल्ली के रामलीला मैदान पर हुई। जिसमें देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु सहित तमाम देश के दिग्गज नेता व विशिष्ट लोगों के साथ सेना के लोग शामिल हुए थे। लता जी के इस गाने को सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की आंखों में आंसू आ गये इसके अलावा सभी लोगों की आंखे नम हो गई। ऐसी थी लता मंगेशकर की गायकी।

पीएम मोदी सहित दिग्गजों ने निधन पर दी श्रृद्धांजलि
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित तमाम बड़े नेताओं,बॉलीवुड हस्तियों, संगीत प्रेमियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए श्रृद्धांजलि दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाली पीढी उन्हें हमेशा याद करेगी। इस खालीपन को कभी भरा नहीं जा सकता।

लोगों के जीवित दिलों में हमेशा रहेंगी लता जी
लता मंगेशकर भले ही आज इस दुनियां को अलविदा कह गयी हों,लेकिन लोगों के दिलों में वो हमेशा याद रहेंगी। उनके गाए गीत सदा लोगों के दिलो में रहेंगे। उन्होने एक गीत गाया था-नाम गुम जायेगा चेहरा ये बदल जाएगा मेरी आवाज ही पहचान है गर याद रहे-लता जी का चेहरा,लता जी का नाम लता जी के गाए गीत हमेशा लोगों को याद रहेंगे। आने वाली पीढ़ी जो संगीत को सीखना और समझना चाहेगी तो उसे लता मंगेशकर को सुनना होगा,समझना होगा।

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