
मेरा फैमिली बैकग्राउंड आर्मी से था और मैं भी देश सेवा ही करना चाहता था इसलिए मैने भोपाल आकर एसएसबी टेस्ट भी दिया था उसके बाद पहली बार मुझे एक ऑप्शन दिखा कि कुछ और भी कर सकते हैं। इतने लोगों को मैंने बाहर से आर्मी में जाने के लिए इंस्पायर किया है। आर्मी से बाहर भी जो बाकी नागरिक है वह भी देश सेवा कर रहे हैं। यह तो हर एक सिटीजन का कर्तव्य है कि जिस भी प्रोफेशन में हैं उसमें रहकर देश की सेवा करें। एक अच्छा नागरिक बने,लोगों की मदद करें, टैक्स पे करें और दूसरों को अच्छे काम के लिए इंस्पायर करें। ये कहना है एमटीवी रोडीज, स्प्लिट्सविला, स्टंट मेनिया जैसे शो कर चुके और लंदन ड्रीम्स, एक्शन रिप्ले, मुंबई कॉलिंग और शराफत गई तेल लेने जैसी फिल्मों में अपना जलवा दिखा चुके एक्टर और वीजे रणविजय सिंघा का।वह भोपाल में फर्जी कैफे की ओपनिंग सेरेमनी में पहुंचे थे। इस दौरान न्यूज़ वर्ल्ड से खास बातचीत में उन्होंने अपने अनुभव साझा किए।
रियलिटी शो के लिए मेंटली, फिजिकली और इमोशनली स्ट्रॉन्ग होना पड़ता है
सबका जो बैकग्राउंड होता है उसका कुछ ना कुछ एडवांटेज होता है कई लोग मेंटली स्ट्रांग होते हैं। कई लोगों ने अपनी लाइफ में ऐसी सिचुएशन देखी है जहां पर इमोशनली स्ट्रांग हो जाते हैं तो कई लोग फिजिकली स्ट्रांग होते हैं। रियलिटी शो में होने के लिए आपको सबका एक सही बैलेंस और सही मिश्रण चाहिए क्योंकि शो में कहीं पर मस्ती भी होती है, कहीं पर फिजिकली स्ट्रॉन्ग होना पड़ता है तो कहीं पर मेंटली स्ट्रॉन्ग क्योंकि कहीं पर ऐसे डिसीजन लेने पड़ते हैं जो आपको इमोशनली आपको ड्रेन कर सकते हैं। मुझे लगता है कि रोडीज़ के लिए वेल बैलेंस होना जरूरी है क्योंकि रोडीज़ बोरिंग लोगों के लिए नहीं है।इसमें मस्ती भी होती,एंटरटेनिंग टास्क भी होते हैं और दिमाग के टास्क भी होते हैं यह नहीं कि सिर्फ पहलवान ही रोडीज़ जीतते हैं। मुझे आर्मी बैकग्राउंड से होने का यह फायदा मिला कि आर्मी बैकग्राउंड से होने से आपका एक्स्पोज़र ऐसा होता है कि आप फिजिकली फिट होते हैं,दिमाग भी लगाते हैं, स्ट्रेटजी भी बनाते हैं,आपको दोस्त बनाने आते हैं। मैं नौ अलग-अलग स्कूल से पढ़ा हूं तो वह भी मेरे लिए एक तरह का एडवांटेज था।
20 साल की उम्र से रहा रोडीज़ का हिस्सा
मैं 20 साल का था जब मैं रोडीज़ में गया था तो मेरी तो जिंदगी ही रोडीज़ रही है। मुझे लगता है कि रोडीज़ की वजह से ही मुझे एक आईडिया मिला कि मुझे क्या करना चाहिए और मैं क्या कर सकता हूं। उसे समय मुझे यह आईडिया नहीं था कि आप 20 साल तक रोडीज़ से कर सकते हैं क्योंकि उसे समय वह एक कैरियर नहीं था। मुझे यह भी सोचना था कि एक बार यहां पर आने के बाद मैं क्या-क्या कर सकता हूं। आप एक्टिंग कर सकते हो, प्रोडक्शन कर सकते हो तो अभी जो आर्टिस्ट का करियर होता है वह 30-40 साल तक होता है बस उसी को खींचने की कोशिश चल रही है देखते हैं आगे ये कहां तक जाता है।
आज फोन से कंटेन्ट बनाकर लोग दुनिया में फेमस हो रहे
हर चीज का अलग स्कोप और अलग ररीच है। कई लोग अपने फोन पर कंटेंट बनाकर दुनिया के अलग कोने तक पहुंच चुके हैं और कई लोगों ने बड़ी-बड़ी फिल्में भी कर ली लेकिन वह नहीं चली। आपको एक आर्टिस्ट होने के नाते यह नहीं देखना चाहिए कि मैं बड़े पर्दे पर हूं या छोटे पर्दे पर या फोन पर या रील पर। आपको खुद को एक्सप्रेस करना आना चाहिए क्योंकि कौन सी चीज कहां पर जाकर किसको इफेक्ट करे, यह किसी को नहीं पता।आज का टाइम आर्टिस्ट के लिए बहुत अच्छा है। आप गाना गा रहे हो चाहे वह अपने रील पर या इंस्टाग्राम पर या उसे टीवी पर गाओ या बड़े पर्दे पर गाओ यूट्यूब पर गाओ, आप नहीं जान सकते कि वह आपको किस मुकाम तक ले जा सकता है इसलिए आर्टिस्ट होने के नाते आपको झिझकना नहीं चाहिए कि आप बड़े पर्दे पर हैं या छोटे पर्दे पर। बस आपको अपने काम को ईमानदारी से करना चाहिए।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

