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कैंसर का खतरा 40-60 की उम्र में सबसे ज्यादा, नई रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

03 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
कैंसर का खतरा 40-60 की उम्र में सबसे ज्यादा, नई रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

उम्र बढ़ने के साथ कैंसर का खतरा बढ़ता है, यह बात लंबे समय से कही जाती रही है। लेकिन अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि कैंसर फैलने का जोखिम हर उम्र में समान नहीं रहता। वैज्ञानिकों के अनुसार 40 से 60 साल की उम्र के बीच कैंसर शरीर में सबसे तेजी से फैल सकता है। हैरानी की बात यह है कि बहुत अधिक उम्र के लोगों में यह खतरा फिर कुछ हद तक कम होता दिखाई दिया है।


रिसर्च में क्या सामने आया?

साइंस डेली में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के Fox Chase Cancer Center के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन पेश किया है। इसे American Association for Cancer Research (AACR) की वार्षिक बैठक में भी प्रस्तुत किया गया। रिसर्च टीम ने कैंसर के फैलाव और उम्र के बीच संबंध को समझने के लिए विशेष प्रयोग किए। इसके नतीजे विशेषज्ञों के लिए भी काफी अहम माने जा रहे हैं।


40-60 साल की उम्र में क्यों बढ़ता है खतरा?

स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता और कैंसर बायोलॉजिस्ट डॉ. मिचेल फेन तथा उनकी टीम ने चूहों पर अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि मेलानोमा (स्किन कैंसर का एक प्रकार) युवा चूहों में सबसे कम फैला। लेकिन मिडिल एज के चूहों में इसका फैलाव तेजी से बढ़ गया। इसके बाद अधिक उम्र वाले चूहों में कैंसर का फैलाव फिर कम होता दिखाई दिया। यहीं से वैज्ञानिकों ने उम्र और कैंसर के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध की पहचान की।


शरीर की सुरक्षा करने वाली कोशिकाएं हो जाती हैं कमजोर

शोधकर्ताओं के मुताबिक इसका सबसे बड़ा कारण शरीर की विशेष प्रतिरक्षा कोशिकाएं हैं, जिन्हें गामा डेल्टा (γδ) टी-सेल्स कहा जाता है। ये टी-सेल्स कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अध्ययन में पाया गया कि युवा और बहुत बुजुर्ग चूहों में इन सुरक्षात्मक कोशिकाओं की संख्या अच्छी बनी रही। लेकिन 40 से 60 वर्ष की उम्र के दौरान इन टी-सेल्स की संख्या काफी कम हो गई, जिससे कैंसर को शरीर में फैलने का मौका मिल गया।


कैंसर ऐसे करता है शरीर पर हमला

रिसर्च में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। वैज्ञानिकों ने पाया कि मिडिल एज में कैंसर कोशिकाएं ऐसे विशेष मॉलिक्यूल्स छोड़ती हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली की बची हुई टी-सेल्स को कमजोर या निष्क्रिय कर देते हैं। जब शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा कमज़ोर पड़ती है, तब कैंसर कोशिकाएं ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं और फेफड़ों, लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंच सकती हैं। यही वजह है कि इस उम्र में कैंसर का फैलाव ज्यादा आक्रामक रूप ले सकता है।


कैंसर की दवाएं क्यों हो जाती हैं फेल?

डॉ. मिचेल फेन के अनुसार दुनिया में कैंसर से जुड़ी लगभग 90 प्रतिशत रिसर्च युवा चूहों पर की जाती है, जिनकी उम्र इंसानों के लगभग 20 वर्ष के बराबर मानी जाती है। ऐसे में कई दवाएं लैब में अच्छे नतीजे देती हैं, लेकिन जब उनका परीक्षण बड़ी उम्र के मरीजों पर होता है तो परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलते। यही अंतर कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।


बुजुर्ग और मिडिल एज मरीजों के लिए बेहतर इलाज की कोशिश

इस चुनौती को दूर करने के लिए Fox Chase Cancer Center ने विशेष Aged Mouse Facility विकसित की है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि बढ़ती उम्र के साथ कैंसर का व्यवहार कैसे बदलता है और अलग-अलग आयु वर्ग के मरीजों के लिए अधिक प्रभावी उपचार कैसे विकसित किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रिसर्च भविष्य में कैंसर की रोकथाम और इलाज दोनों के लिए नई दिशा दे सकती है।


क्या कहती है यह रिसर्च?

यह अध्ययन संकेत देता है कि कैंसर के जोखिम का आकलन केवल उम्र बढ़ने के आधार पर नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से 40 से 60 वर्ष की उम्र ऐसा चरण हो सकता है, जहां शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता में बदलाव कैंसर को अधिक खतरनाक बना देता है। हालांकि यह शोध मुख्य रूप से चूहों पर आधारित है और वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानों में इसके प्रभाव को समझने के लिए आगे और अध्ययन की आवश्यकता होगी।


डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जागरूकता और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी बीमारी, दवा या उपचार से जुड़ा निर्णय लेने से पहले योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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