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डेस्क रिपोर्टर
लगातार बढ़ता हुआ प्रदूषण हमारे दिल, फेफड़ों, दिमाग़ और त्वचा को ही प्रभावित नहीं करता है बल्कि इससे हमारी आंखों पर भी असर पड़ता है। प्रदूषण के कारण कई लोगों की आंखों में जलन, पानी और खुजली की शिकायर सामने आ रही हैं। ऐसा इसलिए होराहा है क्योंकि प्रदूषण के छोटे-छोटे कण आंखों में जा कर इरिटेट करते हैं।
जिस तरह टेक्नोलॉजी ने हमारी ज़िंदगी को आसान बनाया है, वहीं इसके होने वाले कई नुकसान भी हैं। सबसे बड़ा जो नुकसान है वो इसकी लत है, जिससे पीछा छुड़ाना बहुत मुश्किल है। ज़रूरत से ज़्यादा मोबाइल, लैप्टॉप, टीवी का यूज करना आपकी आंखों को काफी प्रभावित करती है। जिसके कारण आखों में जलन होना , खुजली होना, दर्द होना , थकावट सा लगना और सिर की शिकायत होने लगती है। कोरोना महामारी के बाद से वर्क फ्रॉम होम के कारण हम सभी का काम बढ़ गया है। लगातार स्क्रीन पर देखने से ड्राई आइज़ की समस्या बहुत आम हो गई है।
ड्राई आइज़
आंखों में सूखापन या ड्राई आई डिज़ीज़ यह तेज़ी से बढ़ती हुई एक बड़ी समस्या बन गई है। डीईडी की समस्या तब सामने आती है जब लैक्रिमल ग्रंथियां और मीबोमियन पर्याप्त तेल और पानी के तरल पदार्थ उत्पन्न बनाने में असफल हो जाती हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जब उचित मात्रा में आंखों में आंसु पैदा नहीं होते है और जिसके कारण आंखों में नमी कम हो जाती है, जिसके वजह से आंखों से संबंधी कई सारी समसम्याओं का सामना करना पड़ात है।
डीईडी पर वायु प्रदूषण के प्रभाव
नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि, आंखों में एलर्जी और इससे संबंधित दुसरी समस्याओं का कारण सबसे ज्यादा हवा में धूल और धुआं की मात्रा अधिक होने के कारण से है। बढ़ते हुए प्रदूषण की वजह से आंखों में सूखापन और आंखो से संबंधी एलर्जी की घटनाएं बढ़ रही है।
क्या है आंखों में सूखेपन के लक्षण
आंखों में रेडनेस होना
आखों में खुजली होना
रोशनी के प्रति संवेदनशीलता होना
हवा और धुएं
फोटोफोबिया के कारण
धुंधला दिखाई देना
आंखो में जलन होना
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