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डेस्क रिपोर्टर
रेबीज एक फैलने वाली बीमारी है जो संक्रमित जानवरों से इंसानों तक फैल जाती है। यह बीमारी संक्रमित जानवर की लार या फिर काटने के कारण ज्यादा फैलती हैं। ये खतरनाक बीमारी में से एक है। संक्रामण बढ़ जाने से इससे व्यक्ति की जान भी जा सकती। भारत में हर साल डॉग बाइट के लाखों मामले दर्ज किए जाते है। जिसमें से हजारों लोग रेबीज से संक्रमित पाए जाते हैं। देश में धीरे धीरे रेबीज के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिसके पीछे का मुख्य कारण जागरूकता की कमी है। रेबीज के अधिकतर मामले ग्रामीण इलाकों से सामने आते है। साल 1970 के बाद से वैक्सीनेशन के कारण रेबीज की घटनाएं कम सकेंगे को मिलती है। पर आज भी लोग इस बीमारी को गंभीरता से नहीं लेते है।
कैसे फैलता है रेबीज का वायरस?
रेबीज वायरस सबसे अधिक जानवरों के काटने से ही फैलता है। मेडिकल न्यूज टुडे की माने तो जानवर और इंसान दोनों ही रेबीज की चपटे में आ सकते है। यह वायरस संक्रमित जानवरों की लार से दूसरे में फैलता है। बतादें कि, किसी संक्रमित जानवर की लार, खुले घाव या फिर आंख और मुंह के माध्यम से बॉडी के अंदर जा सकता है। ये वायरस रबडोवायरस फैमिली का एक आरएनए वायरस है। जो बॉडी को दो तरह से प्रभावित करता है। ये वायरस आपके नर्वस सिस्टम और ब्रेन पर सीधे जा कर अटैक करता है।

रेबीज वायरस व्यक्ति का इम्यून सिस्टम पर जा कर अटैक्ट कर के उसे वीक बना देता है। वहीं जब यह वायरस ब्रेन में एंट्री करता है तो व्यक्ति कोमा में चले जाता है या फिर उसकी मौत हो जाती है।

क्या होते है रेबीज के लक्षण
- सिरदर्द
- न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम
- इन्क्यूबेशन
- गले में खराश
- कोमा
- बुखार
- एंजाइट
- उल्टी या चक्कर आना
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ऐसे करें रेबीज से बचाव
- पालतू या फिर घरेलू जानवरों का नियमित रूप से रेबीज की वैक्सीनेशन लगवाएं
- आपके पास वैक्सीनेशन की सही जानकारी हो।
- अजरंदाज किए बिना समय पर इलाज कराएं।
- कुत्ते के काटने पर डॉक्टर को तुरंत दिखाएं
- वाइल्ड एनिमल्स से दूर रहें
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