आज कल की लाइफ स्टाइल इतनी हैप्टिक हो गई है कि व्यक्ति न चाहते हुए भी परेशान होने लग जाता हैं। लाचारी, अवसाद और जीवन में कुछ नहीं कर पाने की हताशा या फिर मेडिकल कारणों की वजह से दुनिया भर में हर साल लगभग 70 लाख लोग आत्महत्या करते हैं। इसके साथ ही हर साल 70 लाख से कई गुना अधिक लोग आत्महत्या करनी की कोशिश करते है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यादि उम्र के हिसाब से बात की जाएं तो 15 से लेकर 19 साल के युवाओं के बीच मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या है।
आत्महत्या एक इसी गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या है जो आप तब ही समझ सकते हैं जब आप खुद ऐसी मनोदशा से निकले होंं, इसका कारण समझना बहुत मुश्किल है की आखिर कोई व्यक्ति इस तरह से अपनी जान देने के बारे में कैसे विचार कर सकता है।
आत्महत्या कुछ मनोवैज्ञानिक वजह
डिप्रेशन
डिप्रेशन को मूड डिसऑर्डर कैटेगरी होती है। इसे कहा जाता है कि, यह एक उदासी, किसी चीज की हानि या फिर किसी चीज के प्रति आक्रोश की भावना होना जो उस व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों में उसे परेशान करती है। जिसकी वजह से वे हर वक्त घुटा हुआ महसूस करता रहता है।
साइकोसिस
साइकोसिस एक सीरियस मनोविकार होती है। जिसमें मनुष्य उन चीजों को सुनने या फिर देखने लग जाता है जो की असल में है ही नहीं। उदाहरण के लिए, उसे लगना की उसकी उसकी मां जोर जोर से चिल्ला रही है। ऐसे में मनुष्य उस आवाज को या तो सुन रहा होता है या फिर मां को चिल्लाते हुए देखता है। वहीं उसकी मां ऐसा कुछ कर ही नहीं है।
सबस्टेंस यूज डिसऑर्डर
सबस्टेंस यूज डिसऑर्डर एक मेंटल डिसऑर्डर होता है। जिसमें ड्रग्स या फिर नशे की आदत एक वजह बन जाती है। जानकारी के लिए बता दें कि, यह एक फैमिली हिस्ट्री, एंजायटी, डिप्रेशन या फिर किसी तरह के मेंटल हेल्थ हिस्टी की वजह भी हो सकती है।
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